आदि पर्व  अध्याय ८०

यय़ातिरु उवाच

यदुनाहमवज्ञातस्तथा तुर्वसुनापि च |  १९   क
द्रुह्युना चानुना चैव मय़्यवज्ञा कृता भृशम् ||  १९   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति