अनुशासन पर्व  अध्याय १०

पुरोहित उवाच

एकं वै वरमिच्छामि यदि तुष्टोऽसि पार्थिव |  ४२   क
यद्ददासि महाराज सत्यं तद्वद मानृतम् ||  ४२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति