menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय १०
chevron_left
chevron_right
मरुत्त उवाच
घोरः शव्दः श्रूय़ते वै महास्वनो; वज्रस्यैष सहितो मारुतेन |  १५   क
आत्मा हि मे प्रव्यथते मुहुर्मुहु; र्न मे स्वास्थ्यं जाय़ते चाद्य विप्र ||  १५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति