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शान्ति पर्व
अध्याय १७५
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भृगुरु उवाच
मानसस्येह या मूर्तिर्व्रह्मत्वं समुपागता |  ३६   क
तस्यासनविधानार्थं पृथिवी पद्ममुच्यते ||  ३६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति