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आश्वमेधिक पर्व
अध्याय १०
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मरुत्त उवाच
शिवेन मां पश्य नमश्च तेऽस्तु; प्राप्तो यज्ञः सफलं जीवितं मे |  २२   क
अय़ं यज्ञं कुरुते मे सुरेन्द्र; वृहस्पतेरवरो जन्मना यः ||  २२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति