आदि पर्व  अध्याय ५२

सूत उवाच

ऐरावतकुलादेते प्रैविष्टा हव्यवाहनम् |  ११   क
कौरव्यकुलजान्नागाञ्शृणु मे द्विजसत्तम ||  ११   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति