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आश्वमेधिक पर्व
अध्याय १०
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व्यास उवाच
ततो यज्ञो ववृधे तस्य राज्ञो; यत्र देवाः स्वय़मन्नानि जह्रुः |  ३०   क
यस्मिञ्शक्रो व्राह्मणैः पूज्यमानः; सदस्योऽभूद्धरिमान्देवराजः ||  ३०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति