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वन पर्व
अध्याय १५९
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वैश्रवण उवाच
याः काश्चन मता लोकेष्वग्र्याः परमसम्पदः |  १८   क
जन्मप्रभृति ताः सर्वाः स्थितास्तात धनञ्जय़े ||  १८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति