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विराट पर्व
अध्याय १०
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वैशम्पाय़न उवाच
वृहन्नडां तामभिवीक्ष्य मत्स्यरा; ट्कलासु नृत्ते च तथैव वादिते |  ११   क
अपुंस्त्वमप्यस्य निशम्य च स्थिरं; ततः कुमारीपुरमुत्ससर्ज तम् ||  ११   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति