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विराट पर्व
अध्याय १०
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अर्जुन उवाच
गाय़ामि नृत्याम्यथ वादय़ामि; भद्रोऽस्मि नृत्ते कुशलोऽस्मि गीते |  ८   क
त्वमुत्तराय़ाः परिदत्स्व मां स्वय़ं; भवामि देव्या नरदेव नर्तकः ||  ८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति