वन पर्व  अध्याय २४७

वैशम्पाय़न उवाच

एवमुक्त्वा स भगवान्व्यासः पाण्डवनन्दनम् |  ४७   क
जगाम तपसे धीमान्पुनरेवाश्रमं प्रति ||  ४७   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति