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आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ३२
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व्राह्मण उवाच
समाश्वास्य ततो राजा व्यपेते कश्मले तदा |  ७   क
ततो मुहूर्तादिव तं व्राह्मणं वाक्यमव्रवीत् ||  ७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति