द्रोण पर्व  अध्याय १०

धृतराष्ट्र उवाच

जरासन्धं महावाहुमुपाय़ेन जनार्दनः |  १२   क
परेण घातय़ामास पृथगक्षौहिणीपतिम् ||  १२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति