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शान्ति पर्व
अध्याय २०१
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भीष्म उवाच
रुषद्गुः कवषो धौम्यः परिव्याधश्च वीर्यवान् |  २९   क
एकतश्च द्वितश्चैव त्रितश्चैव महर्षय़ः ||  २९   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति