द्रोण पर्व  अध्याय १०

धृतराष्ट्र उवाच

लोकसम्भावितौ वीरौ कृतास्त्रौ युद्धदुर्मदौ |  ४५   क
भीष्मद्रोणौ हतौ श्रुत्वा किं नु जीवामि सञ्जय़ ||  ४५   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति