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शल्य पर्व
अध्याय १०
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सञ्जय़ उवाच
ततः शरशतैस्तीक्ष्णैर्मद्रराजो महावलः |  १३   क
अर्दय़ामास तां सेनां धर्मराजस्य पश्यतः ||  १३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति