वन पर्व  अध्याय २६६

मार्कण्डेय़ उवाच

स तद्रामाय़ मेधावी शशंस प्लवगर्षभः |  २९   क
रामश्चाप्यनुमानेन मेने दृष्टां तु मैथिलीम् ||  २९   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति