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शल्य पर्व
अध्याय १०
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सञ्जय़ उवाच
यय़ा कैलासभवने महेश्वरसखं वली |  ४८   क
आह्वय़ामास कौन्तेय़ः सङ्क्रुद्धमलकाधिपम् ||  ४८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति