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आदि पर्व
अध्याय १००
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वैशम्पाय़न उवाच
नाम चास्य तदेवेह भविष्यति शुभानने |  १८   क
इत्युक्त्वा स निराक्रामद्भगवानृषिसत्तमः ||  १८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति