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आदि पर्व
अध्याय १००
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वैशम्पाय़न उवाच
स जज्ञे विदुरो नाम कृष्णद्वैपाय़नात्मजः |  २७   क
धृतराष्ट्रस्य च भ्राता पाण्डोश्चामितवुद्धिमान् ||  २७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति