अनुशासन पर्व  अध्याय १००

भीष्म उवाच

संस्तूय़ पृथिवीं देवीं वासुदेवः प्रतापवान् |  ३   क
पप्रच्छ भरतश्रेष्ठ यदेतत्पृच्छसेऽद्य माम् ||  ३   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति