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शल्य पर्व
अध्याय १७
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शकुनिरु उवाच
अन्योन्यं परिरक्षामो यत्नेन महता नृप |  २४   क
एवं सर्वेऽनुसञ्चिन्त्य प्रय़युर्यत्र सैनिकाः ||  २४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति