उद्योग पर्व  अध्याय १००

नारद उवाच

अत्र गाथा पुरा गीता रसातलनिवासिभिः |  १४   क
पौराणी श्रूय़ते लोके गीय़ते या मनीषिभिः ||  १४   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति