menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
भीष्म पर्व
अध्याय १००
chevron_left
chevron_right
सञ्जय़ उवाच
सुशर्मापि ततो वाणैः पार्थं विव्याध संय़ुगे |  २   क
वासुदेवं च सप्तत्या पार्थं च नवभिः पुनः ||  २   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति