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द्रोण पर्व
अध्याय १००
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सञ्जय़ उवाच
भीमसेनेन ते राजन्पाञ्चाल्येन च चोदिताः |  १६   क
आजघ्नुः कौरवान्सङ्ख्ये त्यक्त्वासूनात्मनः प्रिय़ान् ||  १६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति