द्रोण पर्व  अध्याय १००

सञ्जय़ उवाच

दुर्योधनेन सहसा पाण्डवी पृतना रणे |  २७   क
नलिनी द्विरदेनेव समन्ताद्विप्रलोडिता ||  २७   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति