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आदि पर्व
अध्याय १०१
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वैशम्पाय़न उवाच
राजा च तमृषिं श्रुत्वा निष्क्रम्य सह मन्त्रिभिः |  १७   क
प्रसादय़ामास तदा शूलस्थमृषिसत्तमम् ||  १७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति