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शान्ति पर्व
अध्याय १०१
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भीष्म उवाच
निर्मर्यादा दस्यवस्तु भवन्ति परिपन्थिनः |  ३   क
तेषां प्रतिविघातार्थं प्रवक्ष्याम्यथ नैगमम् |  ३   ख
कार्याणां सम्प्रसिद्ध्यर्थं तानुपाय़ान्निवोध मे ||  ३   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति