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शान्ति पर्व
अध्याय १०१
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भीष्म उवाच
मनुष्यापसदा ह्येते ये भवन्ति पराङ्मुखाः |  ३४   क
राशिवर्धनमात्रास्ते नैव ते प्रेत्य नो इह ||  ३४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति