menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
वन पर्व
अध्याय २२१
chevron_left
chevron_right
मार्कण्डेय़ उवाच
अथाभिद्रुत्य महिषो देवांश्चिक्षेप तं गिरिम् |  ५४   क
पतता तेन गिरिणा देवसैन्यस्य पार्थिव |  ५४   ख
भीमरूपेण निहतमय़ुतं प्रापतद्भुवि ||  ५४   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति