स्त्री पर्व  अध्याय १२

वैशम्पाय़न उवाच

एवमेतन्महावाहो यथा वदसि माधव |  ११   क
पुत्रस्नेहस्तु धर्मात्मन्धैर्यान्मां समचालय़त् ||  ११   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति