menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
द्रोण पर्व
अध्याय ११७
chevron_left
chevron_right
सञ्जय़ उवाच
तथा तु परिकृष्यन्तं दृष्ट्वा सात्वतमाहवे |  ५४   क
वासुदेवस्ततो राजन्भूय़ोऽर्जुनमभाषत ||  ५४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति