अनुशासन पर्व  अध्याय १०१

शुक्र उवाच

कार्या रुधिरमांसाढ्या वलय़ो यक्षरक्षसाम् |  ६०   क
सुरासवपुरस्कारा लाजोल्लेपनभूषिताः ||  ६०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति