menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
द्रोण पर्व
अध्याय १०१
chevron_left
chevron_right
सञ्जय़ उवाच
द्रोणं विव्याध सप्तत्या स्वर्णपुङ्खैः शिलाशितैः |  १८   क
सारथिं चास्य भल्लेन वाह्वोरुरसि चार्पय़त् ||  १८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति