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द्रोण पर्व
अध्याय १०१
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सञ्जय़ उवाच
तस्य तद्वचनं श्रुत्वा सारथी रथिनां वरम् |  २४   क
द्रोणाय़ प्रापय़ामास काम्वोजैर्जवनैर्हय़ैः ||  २४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति