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द्रोण पर्व
अध्याय १०१
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सञ्जय़ उवाच
तोमरं तु त्रिभिर्वाणैर्द्रोणश्छित्त्वा महामृधे |  ३४   क
शक्तिं चिच्छेद सहसा कृतहस्तो महावलः ||  ३४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति