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द्रोण पर्व
अध्याय १०१
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सञ्जय़ उवाच
तेषां तद्वचनं श्रुत्वा क्षत्रधर्मा व्यवस्थितः |  ५९   क
अर्धचन्द्रेण चिच्छेद द्रोणस्य सशरं धनुः ||  ५९   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति