menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
द्रोण पर्व
अध्याय १०१
chevron_left
chevron_right
सञ्जय़ उवाच
कृच्छ्रान्दुर्योधनो लोकान्पापः प्राप्स्यति दुर्मतिः |  ७२   क
यस्य लोभाद्विनिहताः समरे क्षत्रिय़र्षभाः ||  ७२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति