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द्रोण पर्व
अध्याय ७२
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सञ्जय़ उवाच
उत्थितान्यगणेय़ानि कवन्धानि समन्ततः |  १२   क
अदृश्यन्त महाराज तस्मिन्परमसङ्कुले ||  १२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति