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आदि पर्व
अध्याय १०२
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वैशम्पाय़न उवाच
वभूव रमणीय़श्च चैत्ययूपशताङ्कितः |  १२   क
स देशः परराष्ट्राणि प्रतिगृह्याभिवर्धितः |  १२   ख
भीष्मेण विहितं राष्ट्रे धर्मचक्रमवर्तत ||  १२   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति