आदि पर्व  अध्याय ११३

वैशम्पाय़न उवाच

ऋषिपुत्रोऽथ तं धर्मं श्वेतकेतुर्न चक्षमे |  १५   क
चकार चैव मर्यादामिमां स्त्रीपुंसय़ोर्भुवि ||  १५   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति