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आदि पर्व
अध्याय १०२
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वैशम्पाय़न उवाच
वणिग्भिश्चावकीर्यन्त नगराण्यथ शिल्पिभिः |  ४   क
शूराश्च कृतविद्याश्च सन्तश्च सुखिनोऽभवन् ||  ४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति