शान्ति पर्व  अध्याय १६०

वैशम्पाय़न उवाच

अपरे दानवा भग्ना रुद्रघातावपीडिताः |  ५७   क
अन्योन्यमभिनर्दन्तो दिशः सम्प्रतिपेदिरे ||  ५७   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति