आदि पर्व  अध्याय १३५

वैशम्पाय़न उवाच

स भवान्मोक्षय़त्वस्मान्यत्नेनास्माद्धुताशनात् |  १२   क
अस्मास्विह हि दग्धेषु सकामः स्यात्सुय़ोधनः ||  १२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति