शान्ति पर्व  अध्याय १६९

पुत्र उवाच

निवन्धनी रज्जुरेषा या ग्रामे वसतो रतिः |  २४   क
छित्त्वैनां सुकृतो यान्ति नैनां छिन्दन्ति दुष्कृतः ||  २४   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति