menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
अनुशासन पर्व
अध्याय १०२
chevron_left
chevron_right
अगस्त्य उवाच
अत्र यत्प्राप्तकालं नस्तद्व्रूहि वदतां वर |  २१   क
भवांश्चापि यथा व्रूय़ात्कुर्वीमहि तथा वय़म् ||  २१   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति