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वन पर्व
अध्याय १०२
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लोमश उवाच
कालेय़ास्तु यथा राजन्सुरैः सर्वैर्निषूदिताः |  १५   क
अगस्त्याद्वरमासाद्य तन्मे निगदतः शृणु ||  १५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति