menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
वन पर्व
अध्याय २२१
chevron_left
chevron_right
मार्कण्डेय़ उवाच
नक्षत्राणि ग्रहाश्चैव देवानां शिशवश्च ये |  १७   क
स्त्रिय़श्च विविधाकारा यान्ति रुद्रस्य पृष्ठतः |  १७   ख
सृजन्त्यः पुष्पवर्षाणि चारुरूपा वराङ्गनाः ||  १७   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति