वन पर्व  अध्याय १०२

लोमश उवाच

मनुष्योरगगन्धर्वय़क्षकिम्पुरुषास्तथा |  २०   क
अनुजग्मुर्महात्मानं द्रष्टुकामास्तदद्भुतम् ||  २०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति