उद्योग पर्व  अध्याय १०२

नारद उवाच

शक्रस्याय़ं सखा चैव मन्त्री सारथिरेव च |  २   क
अल्पान्तरप्रभावश्च वासवेन रणे रणे ||  २   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति